अमीरगढ़ के कानपुरा में आदिवासी समाज की एक पुरानी परंपरा- पूजा करने के बाद ही करते है मक्के खाने की शुरुआत

रिपोर्ट-हरेशभाई राठौड़ (kotdatimes)
29/09/2020

अमीरगढ़ तहसील में वीरमपुर के पास कानपुरा गाँव में कल भाखर बावसी स्थान पर स्थानीय लोगों द्वारा देवी-देवताओं को खाने से पहले नए अनाज (मक्का) की पूजा की गई और लोगों ने बताया की पूजा होने के बाद प्रसाद के रूप में पूरे गाँव मे बांटकर खाते हैं,उसके बाद ही नए अनाजों को घरों में लाते है। इस दौरान स्थानिकोने यह भी बताया की हमारे समाज की यह परंपरा एक संस्कृति है जो प्राचीन काल से चली आ रही है। जब कोई अनाज बोने के बाद फसल तैयार होती है तो गाँव के सभी स्थानीय लोग यहाँ एकत्रित होकर देवी-देवताओं की पूजा करते है उसके बाद ही खाते हैं एवं कटाई करते है।

ऐसी मान्यता है कि फसल की देख-रेख देवी-देवता करते है। और आशीर्वाद के साथ फसल अच्छी तरह से बढ़ती है जिसके लिए देवताओं को खुश करते है ।यहां प्रत्येक व्यक्ति थोड़ा सा मक्का लाता है और यहां नारियल चढ़ाकर,मक्के के दाने डालकर भगवान की पूजा करते है। यहां इकट्ठा हुए बच्चों ओर बुजुर्ग साथ मिलकर मक्के खाने का आनंद लेते है।
यह परंपरा विशेष रूप से अमीरगढ़, दांता, पोशीना, खेड़ब्रह्मां, कोटड़ा, आबूरोड, डूंगरपुर के आदिवासी क्षेत्रों में पाई जाती है। वर्तमान समय में भी आदिवासी समाज में पुरानी संस्कृति को अपनाते है यह बहुत महत्वपूर्ण बात कही जा सकती है,क्योंकि आदिवासी संस्कृति को बचाना ही आदिवासी की एक अलग पहचान है।

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