आदिवासी भाषा में बनी फिल्म मन गोम वाला खिजें ने पर कुछ सवाल और जवाब

आदिवासी भाषा में बनी फिल्म मन गोम वाला खिजें ने पर कुछ सवाल और जवाब
 
सवाल -1. मूवी में जो समस्याएं बताई है वे कोटड़ा,पोशिना,खेद्ब्रह्मा,दांता के अलावा क्या आबूरोड,पाली,स्वरूपगंज आदि की भी है ? बतावें ?
उतर – जी हा इन क्षेत्रों में जंहा आदिवासी भील रहते है क्योंकि वे कोटड़ा,पोशिना खेद्ब्रह्मा में रहने वाले लोगों का हिस्सा है इसीलिए उनमे भी यह समस्या है |
सवाल -2. क्या कभी आप स्वम् खेरवाड़ा,डूंगरपुर,बांसवाडा या भिलोड़ा,मोडासा,विजयनगर,मेघरज के किसी लोकाई में शरीक हुए है ?
यदि नही तो जब भी मौका मिलेगा,मैं आपको उस क्षेत्र की लोकाई में ले जाऊँगा,वंहा की कुछ शूटिंग लेकर आप यंहा की जनजाग्रति में उसका उपयोग अलगी मूवी में या अपने प्रयासों में कर पाएंगे |
उतर – जी जरुर मैं आपके साथ आने का पूरा प्रयास करूँगा जिससे मैं उस संस्कृति को समझकर अपने समुदाय के लिए कार्य कर सकू |
सवाल -3.बीच में शायद सोहन पारगी ने आपको पूछा था – आपको यह कौन करवा रहा है ? किसी ने कमेन्ट भी डाला था उसके जवाब मैं कि बिना पैसे कोई नही करता | मुझे उस पॉइंट पर बहुत बुरा लगा था | वास्तव में आप बहुत दोड़भाग कर रहे हो | लेकिन आपके परिवार जन को भी आपसे आर्थिक सहयोग की आशा होती है |
उतर – मैं इस बात में विश्वास करता हूँ की अगर आप बिना स्वार्थ या स्वार्थ के साथ किसी भी एक काम को ईमानदारी के साथ और लग्न के साथ तन्मयता के साथ करते हो तो आपको पूरी दुनिया सपोर्ट करती है | वो कार्य आप चाहे आप स्वम् के लिए कर रहे है या दुनिया के लिए | रही बात परिवार की तो उन्हें भी सहयोग हो जाता है जब आप आम का बीज ही बोयेंगे तो आपको आम ही मिलेंगे |
सवाल -4.इस मूवी को टूडिया में तो रिलीज कर दिया लेकिन अन्य गांवों में भी दिखाना है,काफी आर्थिक भार पड़ेगा | इसमें सरपंच लोग व हमारे जैसे नौकरी पेशा लोग मदद नही कर सकते क्या ? लेकिन इसमें कई लोग नेगेटिव कमेंट्स करेंगे | चंदा करने वालों को देखकर लोग खिसक जाते है | इसका समाधान क्या होगा ?
उतर –  जी नही बिलकुल आर्थिक भार नही होगा | क्योंकि अगर किसी गाँव में इसे दिखाना भी चाहते है तो उस गाँव में केवल जगह की जरुरत होगी | रही बात इसे दिखाने के साधनों की तो जब आप सही और समाज के लिए कार्य करते है तो जितने हाथ मदत नही करने के उठते है उसी में से कुछ हाथ मदद वाले भी होते है | रही बात नोकरी पेशा लोगो के मदद की तो मैंने अपने अधिकतर कार्यों में जितना आर्थिक सहयोग नही माँगा उससे कहीं ज्यादा गुना समय देने का सहयोग माँगा है | साथ ही आपने चंदा देने की बात कहीं तो चंदा मांगने की जरुरत क्यों हो जब कोई अपना समय दे रहा है तो उसे स्वम् अहसास हो जाता है की मुझे इसमें अपना कितना आर्थिक सहयोग देना होगा जिससे ये कार्य हो पाए |
साथ ही कहना चाहता हूँ की हमें लोगों से समयदान की बात करनी चाहिए ना की पैसो की |
सवाल -5.बीच में अम्बेडकर वादी बन्धुओं का whatsaap पर वीडियो आया था उसमे बताया था एक SC का अधिकारी मंदिर के लिए हजारों रूपये का चेक देता है,लेकिन डॉ.बाबा साहेब के जन्मदिन पर केवल 100 रूपये देता है | अधिकारी का बच्चा प्राण- प्रतिष्ठा समारोह में जाता है जहाँ दंगा हो जाता है और वंहा 8-10 वर्ष का बच्चा दलित होने के कारण मारा जाता है |
मार्मिक किल्प थी | यहीं हाल अपने समाज का भी है | कई लोग किसी और के नाम का चंदा लेकर कहीं और लगा देते है,इसलिए लोग भी सभी को एक ही नजर से देखते है |
प्रश्न वंही है – खर्चो का समाधान क्या होगा ?????
उतर – खर्च का समाधान है लोगों का योगदान | – हर व्यक्ति के पास अलग अलग साधन है,कला है,नोलेज है,जब सब मिल जायेंगे तो सबकुछ एक दुसरे को देकर खर्च का समाधान हो जायेगा | जंहा पैसे मांगने की जरुरत ही नही पड़ेगी | लेकिन हाँ यह तब हो पायेगा जब हर कोई अपना समय दान करना शुरू करे |
उम्मीद है मुरारी जी आप मेरे द्वारा दिए गए सवालों से संतुष्ट होंगे | अगर आपको लगे कोई और भी सवाल छुट गया है तो आप मुझे जरुर भेजे मैं उनका जवाब जरुर दूंगा |
 

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