कोटेश्वर नवहती मेले में राजस्थान की लोक संस्कृति की गूंजी स्वर लहरियां

आबूरोड, (सिरोही) रिपोर्ट सविता बेन ग्रासिया

  • आबूरोड के मीन तलेटी से सटे गुजरात के अंबाजी से सटे सीमावर्ती कोटेश्वर मेले में राजस्थानी आदिवासी संस्कृति की बिखरी झलक
    बुधवार को गुजरात राजस्थान की सीमा की कोटेश्वर महादेव मंदिर परिसर के नवहती मेले में कुंड में अस्थि विसर्जन के बाद महिलाओं ने स्थानीय राजस्थान संस्कृति का अनुठा रंग, स्वर, ताल, और नृत्य से बिखेरा।
  • गुजरात सीमा के मेले में राजस्थान दिवस का सांस्कृतिक रंगारंग:-30 मार्च को राजस्थान दिवस के मौके भी इस मेले में स्थानीय राजस्थान की आदिवासी संस्कृति के रंगीले रंग अपने अंदाज में उड़े। विभिन्न लोकप्रिय अपनी शैली के राजस्थानी शौर्य, वीरता, एवं त्याग से प्रचलित गीत गान की बुलंदियां भी जहां जमकर गुंजी।
  • अपनी वेशभूषा से मर्यादित पूरे पहनावे की परिजनों वाली बेटियों की यहां प्रस्तुतियां अपनी संस्कृति को जीवन रखने का संदेश देती हुई साफ तौर से झलकी।
आबू रोड के मिंनतलेटी राजस्थान की सीमा से सटे गुजरात के अंबाजी के पास कोटेश्वर नवहटी मेले में झलकी राजस्थान की आदिवासी मर्यादित पहनावे की जीवंत संस्कृति।
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