दिव्यांग चोपाराम -दिव्यांग प्रमाण पत्र बना 2010 में किन्तु न ऑनलाइन और न कोई पेंशन

आबूरोड.( सिरोही) रिपोर्ट सविता बेन (आबू रोड ) कोटडा टाइम्स 16/12/2021

तीन प्रशासन शिविरों में जाने वाले दिव्यांग चोपाराम पेंशन के मामले में बड़ा खुलासा।दिव्यांग प्रमाण पत्र बना 2010 में लेकिन न ऑनलाइन और न कोई पेंशन ।अधिकारी बताते रहे खाते में लगातार जा रही है ।
उपलागढ ग्राम पंचायत के राडा गांव का विकलांग चोपाराम बुधवार को पुन: देलदर बैंक गया। जहां बैंक में डायरी एंट्री करवाने पर जानकारी मिली कि उनके खाते में किसी प्रकार की कोई पेंशन नहीं आ रही है।
उसके बाद समीप के एक ईमित्र पर पहुंचा जहां अपना दिव्यांग प्रमाण पत्र चेक करवाया। तो पता चला कि उनका विकलांग प्रमाण पत्र ऑनलाइन नहीं है।

बुधवार को देलदर बैंक, ईमित्र से कोई राहत नहीं मिलने पर अपने पिता के साथ निराश दिव्यांग चौपाराम

दिव्यांगों की योजना ने जरूरतमंद हकदार के साथ की बेईमानी:-
प्रशासन गावों के संग उपलागढ़, निचला गढ़, एवम उपला खेजड़ा पंचायत में दर-दर भटक रहे दिव्यांग चोपाराम को हर शिविर में यह बताया जाता रहा कि आपकी तो पेंशन खाते में आ रही है।
थका हारा बैंक पहुंचा जहां राहत नहीं मिली उसके बाद ई-मित्र पहुंचा वहां पर दिव्यांग प्रमण पत्र ऑनलाइन नहीं होने पर आश्चर्यजनक पहलू यह है कि आखिर उसके खाते में एक बार भी पेंशन नहीं आई है उसका दिव्यांग सर्टिफिकेट ऑनलाइन नहीं है, फिर उसके खाते में हर शिविर में खाते में पैंशन आ रही़ का जवाब क्यों?
दिव्यांग सर्टिफिकेट 2010 में बनने के बाद एक दशक में विकलांगों की योजनाओं का वास्तविक हकदार के छोर तक नहीं पहुंच पाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

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