फिकी रहीं गणगौर की रात तो, दिन उंगने के साथ गुलजार हुआ सियावा मेला!

आबूरोड,( सिरोही) रिपोर्ट -सविता बेन गरासिया (Kotdatimes.com) 21/4/22

शिव पार्वती की संजी झांकी निकली सवारी, ढोल वादको के पीछे ज्वारो के साथ कन्याओं ने किये नृत्य।

मैला अर्थियो ने की खरीदारी,झूलने का लिया आनंद
आदिवासी लोक संस्कृति के रूप में प्रसिद्ध दो दिवसीय सियावा गणगौर का मेला 20 अप्रैल संध्याकालीन बुधवार को शुरू होकर दूसरे दिन गुरुवार को संध्याकालीन हुआ विसर्जित।

सियावा की जलोईया फली से शृंगारित होकर व्रत धारी उपासको की सवारी के साथ पहुंची थी मुख्य मेला स्थल सवारी:-
दो दिवसीय सियावा गणगौर मेले का शिव और पार्वती का श्रृंगार मुख्य मेला स्थल से 2 किलोमीटर दूर जलाईया फली में श्रृंगारित होकर ढोल वादन गाजे-बाजे के साथ महिला कन्या एवं पुरुष साधकों द्वारा सवारी के रूप में मुख्य मेला स्थल सियावा पुल पर बुधवार शाम को झांकी पहुंची। जहां रात भर विधि विधान से नृत्य कार्यक्रम जारी रहे।

हजारों की तादाद में पहले रहने वाली रात की रौनक इस बार रही फिकी:-
किसी जमाने में रात्रि में हजारों की खासी चहल-पहल से शुमार इस मेले में इस बार की रात गिनती के ही मैलार्थी दिखाई दिए!मेले में आए आदिवासी नागरिक की मानें तो वे बताते हैं कि रात्रि में पिछले 10 सालों के दौरान ऐसी अप्रिय घटनाएं घटी जो मौताणा की बदले की भावना, नशा, छेडछाड, लूट, छूरी के हमले आदि जिसके मद्देनजर अब अक्सर लोग रात्रि में आने से बचना चाहते हैं। इस बार रात्रि यही देखा गया कि 9:00 बजे के आसपास सियावा पुल पर गिनती के ही मेलाथीे् दिखे।उसके बाद 12:00 बजे के आसपास कुछ संख्या बढ़ी लेकिन वह आस-पास की ही एवं शिव एवं पार्वती के उपासक महिलाओं एवं पुरुष दिखाई दिए।

दिन उंगने के साथ गुलजार हुआ सियावा मेला:-
दूसरे दिन गुरुवार को दिन उंगने के साथ ही गुजरात समेत उदयपुर एवं जिले के आसपास के गांवों के ग्रामीण वाहनों में आने शुरू हुए दोपहर तक काफी संख्या में मेले में वही रौनक दिखाई दी जो पहले हुआ करती थी।


आदिवासी महिला एवं पुरुषों ने अपने संस्कृतिक गीत गान प्रस्तुत किए। झूले मनोरंजन का लुत्फ देखते ही बन रहा था, लोगों ने खरीदारी की । अनुशासन में कानून के लिए पर्याप्त पुलिस जाब्ता तैनात रहा। अंत में शाम को गणगौर मेले का विसर्जन किया

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