बोर्ड परीक्षा -उपलागढ़- ‘केंद्र, किसी के लिए ‘सुगम, किसी के लिए ‘दुर्गम,

आबूरोड (सिरोही) रिपोर्ट- सविता बेन गरासिया

निचलागढ और निचलाखेजड़ा और जायदरा के लिए ‘सुगम,उपलाखेजड़ा, पाबा, जांबूडी के लिए दुर्गम

गुजरात सीमा से सटे बोसा( जांबूडी) के परीक्षार्थियों के लिए भविष्य निर्माण की परीक्षा के साथ-साथ आवागमन सफर की भी कठिन परीक्षा।राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की ओर से माध्यमिक व उच्च माध्यमिक बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए इस सत्र आबूरोड के उपलागढ़ में भी नया परीक्षा केंद्र शुरू हुआ। यहां भाखर क्षेत्र की आधा दर्जन उच्च माध्यमिक विद्यालयों के परीक्षार्थी आकर परीक्षा दे रहे हैं। केंद्र कुछ के लिए सुगम और कुछ के लिए दुर्गम की चर्चा उस समय सुनाई पड़ती है तब यहां आवागमन के वाहनों का अन्य रूट का सफर संभव नहीं होता।

इन गांवो के परीक्षार्थियों के लिए सुगम बोर्ड परीक्षा का यह केंद्र:-
भौगोलिक परिस्थितियों की उबड़ खाबड़ पहाड़ियों में निवास कर रहे हैं इन स्कूलों के परीक्षार्थियों की बसावट तो घर से मुख्य सड़क तक पैदल है, लेकिन फिर भी उपलागढ का माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का यह नया परीक्षा केंद्र निचलागढ़, निचलाखेजड़ा,व जायदरा स्कूलो एवं गांवों में रहने वाले परीक्षार्थियों के लिए मुख्य सड़क संपर्क से क्रमशः 5, 8 व,9 किलोमीटर उपलागढ़ केंद्र पड़ता है,। यदि यहां वाहन नहीं मिले तो भी विद्यार्थी साइकिल के माध्यम से आसानी से पहुंच कर इम्तिहान के बाद घर लौट आते हैं।

माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के नए परीक्षा केंद्र उपलागढ़ में दुर्गम बोसा (जांबूडी) के परीक्षार्थी अन्य परीक्षार्थियों के साथ परीक्षा देने के बाद वाहनों की इंतजार में सड़क की तरफ बढ़ते हुए

गुजरात सीमा से सटे गांव बोसा( जांबूडी) के परीक्षार्थियों की लंबी दूरी का मुश्किल सफर:-
उपलागढ बोर्ड परीक्षा केंद्र, उच्च माध्यमिक विद्यालय जांबूडी के विद्यालय में पढ़ने वाले बोसा गांव के निवासी आदिवासी दुर्गम बसावट में रहने वाले परीक्षार्थियों के लिए 45 किलोमीटर, उपलीबोर से 42कि.मी., जांबूडी से 40कि.मी, तथा माध्यमिक विद्यालय पाबा, और उच्च माध्यमिक विद्यालय उपला खेजड़ा, में पढ़ने वाले दानबोर, रणोरा, भंमरिया, बूजा के परीक्षार्थियों के गांवों से 20 से 30 किलोमीटर दूरी पर पड़ता है!
जांबूडी रूट पर गुजरात के अंबाजी दानबोर के वाहन चलते हैं, निचलागढ- उपलागढ़ रूट के सीधे वाहनों का संचालन नहीं होने से परीक्षा की घड़ी का कीमती समय सफर में बर्बाद होने का अंदेशा इन विद्यार्थियों के माथे पर झलकता है।यह भी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भविष्य निर्माण की परीक्षा के साथ-साथ यहां डगर की भी कठिन परीक्षा से आदिवासी बोर्ड परीक्षार्थियों को गुजरना पड़ता है।

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