महिला संगम – गांवसभा में महिला की भागीदारी के बगैर विकास संभव नहीं

23/01/2022 कोटडा (KOTDATIMES.COM)

आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व विकास और उनकी समाज के सभी ढांचों में भागीदारी बढ़ाने के लिए आदिवासी विकास मंच द्वारा कोटड़ा, मामेर और देवला क्षेत्र में 2 दिवसीय महिला संगम का आयोजन किया गया। संगम में देवला में 36 गांव से 46 महिलाओ ने, कोटड़ा में 36 गांव से 55 महिलाओ व मामेर में 18 गांव से 68 महिलाओ द्वारा भागीदारी की गई। कुल 90 गांव से 160 महिलाओ ने भाग लिया।

गांव विकास आयोजना में महिला भागीदारी बढ़ाई जाए

आदिवासी इलाका होने के कारण यहां पेसा कानून लागू है जिससे गांवसभा का अधिकार है कि गांव के विकास की आयोजना स्वयं सभी मिलकर तैयार करे परन्तु महिलाओ की इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी नही हो रही है जिससे समावेशित आयोजना नही बन पाती।संगम में महिलाओ की इस प्रक्रिया में क्या महत्ता है व क्या उनकी भूमिका है इस पर समझ बनाई गई व उन्हें अधिक अधिक संख्या में स्वयं व अन्य महिलाओ को भाग लेने के लोए प्रेरित किया गया।

सभी ढांचों में हो महिलाओ की समान भागीदारी

सामाजिक, राजनेतिक ढांचों में सरकार द्वारा महिलाओ की समान भागीदारी के लिए प्रावधान किए गए है लेकिन सामाजिक तोर पर आज भी महिलाएं वहाँ पर सक्रिय नही है। अतः गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर पर सभी ढांचों में महिलाओ की भागीदारी कप बढ़ाने के लिए आयोजना तैयार की गई।

नरेगा में महिला मेट को ही मिले मान्यता
नरेगा में महिलाएं ही अधिकांश काम पर जाती है परन्तु मेट में उन्हें नही लगाया जा रहा है जबकि सरकार की ओर से प्रावधान किया गया है। संगम में सभी महिलाओ को मेट के रूप में स्थापित करने पर चर्चा की गई।इसके साथ ही देवला इलाके में बढ़ रही सिलिकोसिस बीमारी व उसकी नीति को लागू करवाने के लिए सहयोग करने, सामुदायिक वन दावा तैयारी व जंगल का प्रबंधन करने, कोरिन टीकाकरण करवाने, विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजना का जुड़ाव सभी महिलाओ का करवाने पर चर्चा हुई।

संगम में रापलीबाई, हेमलता श्रीमाली, आनंदी बेन, मंजुला, काली द्वारा सन्दर्भ प्रदान किया गया। आस्था से निदेशक भवरसिंह चंदाना, मंच के संयोजक बाबुलाल गमार, समन्वयक सरफराज़ ने भी अपनी बात रखी।

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