सौ वर्ष बाद भी नहीं बना सिरोही भुला के लीलुडी बडली में शहीद स्मारक

रिपोर्टर:- बाबुलाल भील काछोली (Kotdatimes.com) 7/5/2022
मो .न .9783809863


लीलुडी बडली (भूला) मे आज से सौ वर्ष पूर्व 5 व 6 मई 1922 को वालोरिया व भूला गांव के लीलुडी बडली नामक स्थान पर बहुत बड़ा नरसंहार हुआ था।जिसमें 1200 आदिवासी मारे गये थे।। उस समय सामंती राज चलता था तथा उनके भी उपर अंग्रेजी राज था।

तो आदिवासी समाज को दोहरे शासन की मार थी। खेतों में जो भी धान, अनाज पकता उसका भारी भरकम (भोग) लगान सामंत लोगों को देना होता था।

उस समय के आदिवासी समाज इस भोग की प्रथा से तंग आ चुके थे।उसी समय आदिवासियो की मुलाकात मोतीलाल तेजावत जी से होती है। उन्होंने इस प्रथा के खिलाफ आदिवासी समाज के आक्रोश में (आग में घी डालने का काम किया) । मोतीलाल ने सभी आदिवासी समाज को एक होकर विरोध की बात बताई।इस लिए इस आन्दोलन को इतिहास में एकी आन्दोलन के नाम से भी जानते हैं।। सामंत लोगों में भय का माहौल बन गया था इसलिए उन्होंने इसकी खबर अंग्रेजों को दी।

अंग्रेजो ने भी आदिवासी भील समाज के खिलाफ लडने के लिए “मेवाड़ भील कौर बटालियन” को बुलाया तथा उनकी मदद से इस बड़े आन्दोलन के लिए हो रही तैयारी वाले बड़े सम्मेलन को चारों तरफ से घेर कर निहत्थे आदिवासी भील व गरासिया समाज के 1200 लोगो को निंद की मौत सुला दिया।

अंग्रेजो के पास आधुनिक हथियार थे जबकि आदिवासी समाज के पास केवल परम्परागत तीर कमान व गोफन थी जिससे मरते दम तक सामना किया।। अंग्रेजो ने आस पास के घरों को भी नहीं छोड़ा वहां जाकर घरों में भी आग लगा दी थी।उस समय काफी संख्या में आदिवासी समाज विस्थापित हुआ था जो आजकल आस पास के गांवों में निवास करता है।।


इतनी बड़ी घटनाएं आज भी इतिहास के पन्नों से गायब है। जबकि सरकार आजादी का अमृत महोत्सव मना रही है।इस शहादत को 100 पर पुर्ण हो चुके हैं लेकिन वीर शहीदों व उनके परिजनों को उचित कोई मान सम्मान नहीं दिया।और न ही उस ऐतिहासिक स्थल पर एक ईंट लगाई है।

2013 में मुख्यमंत्री साहब ने जरुर एक शिलालेख पट्टी लगाई थी लेकिन आज वो भी मौकै पर गायब है।।100 साल में कांग्रेस व बीजेपी सरकार ने बारी-बारी से राज किया लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया।

कांग्रेस सरकार ने जरुर एकबार बजट जारी करके झुनझुना पकडा करके आदिवासी समाज के वोट बटोरे थे।।इस बार दुबारा झुनझुना जरुर पकडा दिया है। अब आदिवासी समाज को तैय करना है की हमे क्या करना चाहिए।। इस बार आदिवासी परिवार द्वारा वीर शहीदो‌‌ की याद में 6 दिन का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जिसमें 5 दिन खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की गई व 6 मई को महासम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें आदिवासी समाज के बुद्धिजीवी सांस्कृतिक गुरु भंवरलाल परमार , राजनेता रामप्रसाद डिंडोर विधायक सांगवाडा, कांतिलाल रोत सांसद प्रत्याशी,डा मणीलाल गरासिया, मांगीलाल निनामा, पोपटलाल खोखरिया,लीलाराम गरासिया प्रधान आबुरोड, नींबाराम गरासिया (PCC) ने सभा को सम्बोधित किया।

मंच संचालन अध्यापक मुकेश राज गमेती भुला ने किया।इस मौके पर प्रतियोगिता में विजेता व उपविजेता टीमो तथा नवचयनित कर्मचारियों को अतिथियों के हाथों मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।।

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